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Kaka hathrasi selected hasya kavita

हास्य

काका हाथरसी की चुटकियां और उनसे जुड़ा एक मज़ेदार वाक़या

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली

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काका हाथरसी का असली नाम प्रभु लाल गर्ग था। लेकिन वह काका कैसे बन गए इसके पीछे भी एक दिलचस्प कहानी है। दरअसल प्रभु दयाल 'काका' के नाम से नाटक किया करते थे, इससे उन्हें ख़ासी प्रसिद्धि भी मिली। इसके बाद उन्होंने काका का नाम अपने लेखन में भी जोड़ लिया और हाथरस का होने की वजह से वह हाथरसी हुए। काका को संगीत का भी ज्ञान था, उन्होंने संगीत कार्यालय की भी स्थापना की थी जो क्लासिकल संगीत की मैगेज़िन छापा करती थी। काका हाथरसी कवि सम्मेलनों के एक चर्चित नाम थे और दूर-दूर से लोग उनकी कविताएं सुनने आया करते थे। भारत सरकार ने 1985 में काका जी को पद्मश्री से सम्मानित भी किया था। 

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