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सोना पहनने वाले लोग रखें इन बातों का ख़ास ख्याल
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कांग्रेस ने सचिवालय के बाहर किया प्रदर्शन, दर्जनों लोगों पर केस दर्ज

कोरोना से हिमाचल में पर्यटन को 5000 करोड़ से अधिक की चपत

वैश्विक महामारी कोरोना पहाड़ी राज्य हिमाचल के पर्यटन कारोबार पर कहर बनकर टूटी है। तीन महीने में पर्यटन कारोबार को 5000 हजार करोड़ से अधिक की चपत लग चुकी है। 50 हजार से अधिक लोगों को या तो रोजगार से हाथ धोना पड़ा है या उनके रोजगार पर संकट की तलवार लटकी है। सैलानियों से सीधे जुड़े 6000 हजार से अधिक होटल, होम स्टे यूनिट और गेस्ट हाउस बंद हैं। कोरोना की मार के ये आंकड़े शिमला, कुल्लू-मनाली, कांगड़ा समेत धर्मशाला, मैकलोडगंज और चंबा जिले के हैं। पूरे प्रदेश की बात करें तो नुकसान के आंकड़े इससे कहीं अधिक हैं।

अनलॉक-02 में केंद्र की गाइडलाइन पर जयराम सरकार ने हिमाचल के द्वार भले ही सैलानियों के लिए खोल दिए हैं, लेकिन स्थिति में सुधार होता नहीं दिख रहा है। कोरोना संक्रमण के खतरे से बड़ी संख्या में होटल कारोबारी और व्यापारी सैलानियों का स्वागत करने से गुरेज कर रहे हैं। कड़ी शर्तों के चलते प्रदेश में प्रवेश करने वाले सैलानियों को लौटाया जा रहा है। बरसात का सीजन भी शुरू हो चुका है। साफ है कि इस विकट स्थिति से निपटने और पर्यटन कारोबार को पटरी पर लाने में हिमाचल को अभी लंबा समय लगेगा।

कोरोना ने 30 साल में पहली बार कुल्लू-मनाली के पर्यटन को दो हजार करोड़ का झटका दिया है। साढ़े तीन माह से बंद पर्यटन गतिविधियों के कारण करीब 20 लाख सैलानी कुल्लू-मनाली और रोहतांग का दीदार नहीं कर सके। 3000 होटल, रेस्तरां, कॉटेज, होमस्टे तथा रेस्टहाउसों में ताला लटका है।

पर्यटन सीजन में काम करने वाले 20 हजार लोगों का रोजगार छिन गया है। अप्रैल से जुलाई तक सैलानियों से गुलजार रहने वाले कुल्लू जिले के करीब एक दर्जन से अधिक पर्यटन स्थल सूने पड़े हैं। साहसिक गतिविधियां ठप हैं। पिछले साल इसी अवधि में 15 लाख से अधिक सैलानी कुल्लू-मनाली आए थे। जिले के कारोबारियों को अब दशहरा में ही पर्यटन कारोबार चलने की उम्मीद है। शिमला में कोरोना ने पर्यटन कारोबारियों को 1500 से अधिक की चोट दी है।
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ऑस्ट्रियन टनल मैथड तकनीक से बनेगी भानुपल्ली-बिलासपुर-बैरी रेललाइन

सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण भानुपल्ली-बिलासपुर-बैरी रेललाइन न्यू ऑस्ट्रियन टनल मैथड (एनएटीएम) तकनीक पर बनेगी। इस ब्रॉडगेज लाइन की चौड़ाई 1674 एमएम होगी। बिलासपुर से पंजाब से सटी सीमा पर छह टनल का कार्य चल रहा है। इनमें से दो टनल का 100 मीटर और चार का 50 मीटर तक काम हो चुका है। हालांकि, लॉकडाउन में जेएंडके व अन्य राज्यों की लेबर की घर वापसी के बाद 23 मार्च से 23 अप्रैल तक टनल का काम ठप जरूर रहा, लेकिन निर्माता कंपनी की ओर से लोकल लेबर हायर कर काम शुरू करवाया गया।

अब सभी टनल का निर्माण कार्य तेज गति से चल रहा है। रेल विकास निगम के साइट इंजीनियर उपेंद्र परमार ने बताया कि प्रथम चरण में भानुपल्ली से बैरी तक 63.1 किमी लंबी रेललाइन का निर्माण किया जाएगा। जिले की सीमा पर दो टनल का काम चल रहा है और बीस किमी एरिया तक 7 टनल बनेंगे।

रेल विकास निगम ने जंडौरी से लेकर कांगूवाली तक लगभग छह किमी लंबी 7 टनल निर्माण का जिम्मा हैदराबाद की मैक्स इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड कंपनी को 435 करोड़ में अवार्ड किया है। जंडौरी में टनल एक व टनल दो नंबर का काम चल रहा है और दोनों ही टनल लगभग डेढ़ किमी लंबी हैं। इससे आगे कांगूवाली तक 4 अन्य टनल निर्मित की जाएंगी। इन सभी सातों टनल की कुल लंबाई छह किमी बनती है। 
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हिमाचल के डिग्री कॉलेजों में आज से शुरू होगी प्रवेश प्रक्रिया

भानुपल्ली-बिलासपुर-बैरी रेललाइन
हिमाचल के डिग्री कॉलेजों में सोमवार से प्रवेश प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। उच्च शिक्षा निदेशालय ने सभी कॉलेज प्रिंसिपलों को बारहवीं कक्षा पास कर चुके विद्यार्थियों को ऑनलाइन माध्यमों से दाखिले देने के आदेश जारी कर दिए हैं। सोमवार से कॉलेजों में प्रवेश प्रक्रिया पूरी करने के लिए प्रिंसिपल सहित अनिवार्य स्टाफ को आना पड़ेगा। निदेशालय ने फर्स्ट और सेकेंड के विद्यार्थियों को अगली कक्षा में रोल ऑन आधार पर दाखिले देने को भी मंजूरी दे दी है।

13 से 31 जुलाई तक प्रवेश प्रक्रिया को पूरा किया जाएगा। अगर कोई विद्यार्थी 31 जुलाई तक किन्हीं कारणों से दाखिले नहीं करवा सकेंगे तो उन्हें अगस्त में भी दाखिले दे दिए जाएंगे। उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. अमरजीत कुमार शर्मा ने बताया कि प्रदेश सरकार के आदेशानुसार सोमवार से सभी कॉलेजों में ऑनलाइन दाखिलों की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। उच्च शिक्षा निदेशक ने सभी कॉलेज प्रिंसिपलों को दाखिलों की प्रक्रिया ऑनलाइन माध्यमों से ही पूरा करने को कहा है।

अधिकांश कॉलेजों की वेबसाइट बनी हुई है। इससे दाखिले दिए जा सकते हैं। इसके अलावा विद्यार्थियों को फोन के माध्यम से भी दाखिले करवाने की सुविधा मिलेगी। विशेष परिस्थितियों में अभिभावक स्वयं कॉलेज में आकर इस प्रक्रिया को पूरा कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि फर्स्ट ईयर में दाखिलों का 31 जुलाई तक पंजीकरण किया जाएगा। इन्हें कंफर्म बाद में किया जाएगा। स्कूलों में भी जमा एक में आज से ऑनलाइन दाखिले शुरू हो जाएंगे। 

सीबीएसई रिजल्ट का इंतजार, पहली अगस्त के बाद कंफर्म होंगे दाखिले
फर्स्ट ईयर में दाखिलों को पहली अगस्त के बाद कंफर्म किया जाएगा। 13 से 31 जुलाई तक दाखिलों के लिए पंजीकरण किया जाएगा। सीबीएसई का बारहवीं कक्षा का परीक्षा परिणाम अभी जारी नहीं होने के चलते यह फैसला लिया गया है। राज्य स्कूल शिक्षा बोर्ड और आईसीएसई के परिणाम घोषित हो चुके हैं। ऐसे में सीबीएसई के परिणाम निकलने के बाद ही फर्स्ट ईयर में मेरिट तय करने के बाद दाखिलों को कंफर्म किया जाएगा।

कॉलेजों में थर्मल स्कैनर, सैनिटाइजर का किया जाएगा इंतजाम
कॉलेजों में प्रवेश प्रक्रिया बेशक ऑनलाइन माध्यम से की जाएगी लेकिन, स्टाफ के आने के चलते शिक्षा निदेशालय ने प्रिंसिपलों को थर्मल स्कैनर, सैनिटाइजर का इंतजाम करने को कहा है। इसके अलावा आने और जाने के लिए अलग-अलग रास्ते चुनने को कहा है। अगर कहीं ज्यादा एंट्री प्वाइंट हैं तो उन्हें बंद भी करना होगा। स्टाफ के बीच भी सोशल डिस्टेंसिग का पालन करने के आदेश दिए गए हैं।
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सेब सीजन के लिए नेपाली मजदूरों को टनकपुर से लाने लगीं एचआरटीसी बसें

सेब सीजन में मजदूरों की किल्लत से जूझ रहे प्रदेश के हजारों बागवानों के लिए राहत भरी खबर है। बगीचों में काम करने वाले नेपाली श्रमिकों को टनकपुर बॉर्डर से लाने की प्रक्रिया जयराम सरकार ने शुरू कर दी है। हिमाचल परिवहन के सोलन डिपो की पहली बस टनकपुर बॉर्डर से 22 नेपाली मजदूरों को लेकर शिमला जिले के कोटखाई पहुंच गई।  

नेपाली मजदूरों को लाने के इच्छुक बागवानों को संबंधित उपमंडल अधिकारी (एसडीएम) को सूचित करना होगा। एसडीएम मजदूरों को लाने के लिए परमिट जारी करेंगे। पहुंचने के बाद मजदूरों को 14 दिन बगीचे में ही क्वारंटीन किया जाएगा। इस दौरान मजदूर बगीचे में काम भी कर सकेंगे, लेकिन उन्हें सार्वजनिक जगहों पर जाने की इजाजत नहीं होगी।

मजदूरों को लाने के लिए बसें नेपाल बॉर्डर टनकपुर तक भेजने में पूरी एहतियात बरती जाएगी। बसों को रवाना करने से पहले पूरी तरह सैनिटाइज किया जाएगा। ड्राइवर और कंडक्टर को सैनिटाइजर, मास्क, ग्लव्ज, फेस शील्ड उपलब्ध करवाए जाएंगे। ड्राइवर और कंडक्टर को मजदूरों के संपर्क में भी नहीं आना होगा।

एचआरटीसी शिमला के मंडलीय प्रबंधक दलजीत सिंह का कहना है कि प्रशासन के निर्देशों पर यदि मजदूरों को टनकपुर से लाने के लिए डिमांड आती है, तो बसें उपलब्ध करवाई जाएंगी। एक बस टनकपुर भेजी गई थी जो मजदूरों को लेकर लौट आई है।
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हिमाचल में मछुआरों की फ्री इंश्योरेंस दो से बढ़कर हुई पांच लाख, किसान क्रेडिट कार्ड स्कीम में पशुपालन-मत्स्य विभाग भी शुमार

कोरोना योद्धा: डॉक्टर बनते ही शिवानी ने कोविड सेंटर में 45 मरीजों का किया इलाज

25 की उम्र में डॉक्टर बनीं और पहली नियुक्ति में ही कोविड-19 केयर सेंटर में अपनी इच्छा से ड्यूटी देकर हमीरपुर की कोरोना योद्धा डॉ. शिवानी शर्मा ने चार दर्जन कोरोना मरीजों का इलाज किया। अपराजिता बनकर इस युवा डॉक्टर ने अपनी काबिलियत के दम पर आधी दुनिया को प्रोत्साहित करने का कार्य किया है।

डॉ. शिवानी शर्मा हमीरपुर नगर परिषद के वार्ड नंबर 5 की रहने वाली हैं। एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी करने के बाद 27 अप्रैल 2020 को डॉ. शिवानी शर्मा की पहली नियुक्ति प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पंचरुखी जिला कांगड़ा में हुई। पीएचसी पंचरुखी चिकित्सा खंड गोपालपुर के अंतर्गत आता है। 

इसी चिकित्सा खंड में कोविड-19 केयर सेंटर डाढ़ है। जहां पर जिला कांगड़ा के कोरोना संक्रमितों को रखा गया है। डॉ. शिवानी शर्मा ने 6 जुलाई 2020 से 12 जुलाई 2020 तक कोविड-19 केयर सेंटर डाढ़ में ड्यूटी दी है। इस दौरान इस सेंटर में 45 कोरोना संक्रमितों का इलाज किया गया। वर्तमान में इस सेंटर में महज 28 कोरोना मरीज रह गए हैं।

जबकि शेष स्वस्थ होकर घर लौट चुके हैं। डॉ. शिवानी के पिता धमेंद्र शर्मा नगर परिषद हमीरपुर के वाइस चेयरमैन के पद पर सेवाएं दे चुके हैं। जबकि, माता मंजू लता गृहिणी हैं। डॉ. शिवानी का भाई बीटेक कर चुका है। पिता धमेंद्र शर्मा और माता मंजू लता ने कहा कि उन्हें अपनी बेटी पर गर्व है। पिता ने बताया कि रविवार को सात दिन की ड्यूटी खत्म होने के बाद बेटी अब अगले 14 दिन तक संस्थागत क्वारंटीन में रहेगी।
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