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चंद्र ग्रहण में छोटा सा दान, बनाएगा धनवान : 5 जून 2020
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दिल्ली में एक दिन में मिले 1359 कोरोना मरीज, 22 की मौत, कुल संख्या 25 हजार के पार

राजधानी में कोरोना संक्रमण अब खतरनाक रूप ले चुका है। बीते 24 घंटे में 1359 नए पॉजिटिव केस आए हैं और 22 मरीजों की मौत के बाद कुल मामलों की संख्या 25 हजार के पार पहुंच गई है। राहत की बात यह रही कि गुरुवार को विभिन्न अस्पतालों से 356 मरीजों को इलाज के बाद छुट्टी दे दी गई। 

दिल्ली स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, अब कुल संक्रमितों की संख्या 25004 हो गई है, जबकि 650 मरीजों की मौत हो चुकी है। हेल्थ बुलेटिन में गुरुवार को 44 मौत बताई गई है। हालांकि, इसमें से 22 मामले ही बीते 24 घंटो के हैं। अन्य, 22 वे मौतें हैं, जो पहले हुई थी, लेकिन अस्पतालों ने जानकारी अब उपलब्ध कराई है।    
 



विभाग के अनुसार दिल्ली के कोविड समर्पित अस्पतालों में कोरोना के मरीजों के लिए 8386 बेड और 408 वेटिलेटर उपलब्ध हैं। इनमें से अब तक 3306 बेड और 307 वेटिलेटर भर चुके हैं। वहीं, कोविड हेल्थ सेंटर में 177और कोविड केयर सेंटर में 987 मरीजों का इलाज चल रहा है। इनमें हेल्थ सेंटर में 285 और कोविड केयर सेंटर में 5292 मरीजों को रखने की क्षमता है।

59 इलाके कंटेनमेंट जोन से बाहर, 163 सील
अनलॉक-1 में कंटेनमेंट जोन की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। दिल्ली में फिलहाल 163 कंटेनमेंट जोन हैं। सबसे ज्यादा 31-31 कंटेनमेंट जोन उत्तरी और दक्षिण पश्चिमी जिले में हैं। इसी तरह दक्षिणी व दक्षिण-पूर्व में 27-27 कंटेनमेंट जोन हैं।

अधिकारियों का कहना है कि कोरोना वायरस का संक्रमण मिलने से बीते 48 घंटों में कंटेनमेंट जोन बढ़ते जा रहे हैं। फिलहाल 163 इलाके सील है, जबकि पिछले दिनों 147 इलाके दिल्ली में सील किए गए थे।
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दिल्ली में कोरोना वायरस दिल्ली में कोरोना वायरस

सत्येंद्र जैन का आरएमएल पर आरोप, कोरोना जांच की गलत रिपोर्ट दे रहा अस्पताल

दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन ने डॉ. राम मनोहर लोहिया (आरएमएल) अस्पताल पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि आरएमएल अस्पताल कोरोना वायरस की गलत जांच रिपोर्ट दे रहा है। इसी के साथ उन्होंने अस्पताल पर लापरवाही  बरतने के भी आरोप लगाए हैं। 

जैन ने आगे कहा कि आरएमएल अस्पताल कोरोना की जांच रिपोर्ट समय पर नहीं दे रहा है। 70 प्रतिशत लोगों  की मौत अस्पताल पहुंचने के 24 घंटों के अंदर हो रही है, क्योंकि आरएमएल कोरोना की जांच रिपोर्ट देने में 5-7 दिन का वक्त लगा रहा है। जबकि कोरोना जांच रिपोर्ट 24 घंटे के भीतर आ जानी चाहिए।

उन्होंने कहा कि बीते दिनों आरएमएल अस्पताल ने एक दिन में 94 प्रतिशत सैंपल पॉजिटिव बताए थे। जब दोबारा जांच की गई तो 45 प्रतिशत सैंपल निगेटिव पाए गए।  सत्येंद्र जैन ने कहा कि उन्होंने इसके लिए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन सिंह से बात की है।

राघव चड्ढा ने भी लगाए थे आरोप  
आम आदमी पार्टी के नेता राघव चड्ढा ने भी आरएमएल अस्पताल पर गलत जानकारी देने के आरोप लगाए हैं। उन्होंने  कहा था कि कोरोना के खिलाफ लड़ाई में जांच सबसे महत्वपूर्ण है। मगर आरएमएल अस्पताल में गलत टेस्टिंग की जा रही है और लोगों की जान के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। राघव ने बताया कि आरएमएल अस्पताल में 45 प्रतिशत जांच रिपोर्ट गलत निकली हैं। 

जांच रिपोर्ट में देरी पर लैब संचालकों को नोटिस, कई किए गए तलब 
कोरोना वायरस की जांच रिपोर्ट एक बार फिर देरी से मिलने लगी हैं। एक महीने पहले भी ऐसी ही स्थिति का सामना करना पड़ रहा था जब दिल्ली सरकार ने लैब को एक दिन में ही रिपोर्ट देने के सख्त निर्देश दिए थे लेकिन राजधानी के लोग एक बार फिर उसी स्थिति का सामना कर रहे हैं। 

इसे लेकर सत्येंद्र जैन का कहना है कि कोरोना की रिपोर्ट में देरी होने के चलते कई लैब संचालकों को नोटिस दिया है। बीते दो दिन में दो लैब संचालकों से जबाव भी मांगा है। हालांकि सत्येंद्र जैन का कहना है कि एक व्यक्ति अगर कोरोना पॉजिटिव मिलता है तो उसके संपर्क में आने वाले कई लोग जांच कराने पहुंच रहे हैं। ऐसे में जांच कराने वालों की लंबी-लंबी लाइनें देखने को मिल रही हैं।

जबकि नियम यह कहता है कि अगर कोई कोरोना पॉजिटिव है और उसके संपर्क में आया कोई व्यक्ति हाईरिस्क जोन (डायबिटीज, किडनी या अन्य रोग, बुजुर्ग, लक्षण) इत्यादि है तो ही वह जांच कराने जाए। कोरोना जांच को लेकर एक दिन पहले ही दिल्ली सरकार ने नए जांच नियमों को लागू किया है, जिसमें लक्षणों के आधार पर ही जांच को अनिवार्यता दी गई है। 
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दिल्ली : निजी अस्पतालों में कोरोना मरीजों के लिए आरक्षित होंगे 20 फीसदी बेड

कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए दिल्ली सरकार ने निजी अस्पतालों में 20 प्रतिशत बेड को कोरोना मरीजों के लिए आरक्षित करने निर्देश दिया है। इसका उद्देश्य यह है कि अन्य रोगों के मरीजों को यदि कोरोना हो तो कोई भी अस्पताल उनके इलाज से इनकार न कर सके। अगर 20 प्रतिशत बेड सुरक्षित करने में लॉजिस्टिक दिक्कत होगी तो पूरे अस्पताल को कोरोना डेडिकेटेड अस्पताल घोषित कर दिया जाएगा। दिल्ली सरकार ने निजी अस्पतालों को एक दिन का समय दिया है।

दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन ने संयुक्त प्रेस कान्फ्रेंस में बताया कि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का साफ कहना है कि सबकी जान बचाना सरकार की प्राथमिकता है। कोरोना के मामले बढ़ रहे हैं।

इसलिए कोरोना डेडिकेटेड अस्पतालों की संख्या बढ़ाई जा रही है। पांच सरकारी व तीन प्राइवेट अस्पतालों को कोरोना आरक्षित बनाया गया है। 61 प्रमुख निजी अस्पतालों के 20 प्रतिशत बेड कोरोना मरीजों के लिए आरक्षित करने का निर्देश दिया गया है। ऐसे अस्पताल अब अन्य रोगों वाले कोरोना मरीजों के इलाज से इनकार नहीं कर सकते हैं।

सिसोदिया ने यह भी कहा कि बहुत से अस्पतालों ने इसे मान लिया है। कुछ अस्पतालों ने मिक्स सिस्टम में असमर्थता जताई है। ऐसे अस्पतालों को कल (शुक्रवार) तक का समय दिया गया है। जिन अस्पतालों को मिक्स सिस्टम में दिक्कत होगी तो उन्हें कोरोना आरक्षित अस्पताल घोषित कर दिया जाएगा। मूलचंद, गंगाराम और सरोज को कोराना डेडिकेटेड अस्पताल बनाया गया है।
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दिल्ली हिंसा : दिलबर नेगी हत्याकांड में पुलिस ने दायर की चार्जशीट 

दिल्ली हिंसा के दौरान हुए गोकुलपुरी हत्याकांड मामले में पुलिस ने गुरुवार को चार्जशीट दायर की। पुलिस ने 26 फरवरी को दिलबर नेगी का शव क्षत-विक्षत स्थिति में बृजपुरी के अनिल स्वीट हाउस में पाया था।

दिल्ली हिंसा की जांच कर रही विशेष जांच दल (एसआईटी) की टीम ने 07 मार्च को दिलबर नेगी नाम के युवक की हत्या के आरोप में शाहनवाज को गिरफ्तार किया था। दिलबर नेगी दिल्ली हिंसा में मारा गया था और इसका शव शिव विहार के अनिल स्वीट हाउस में 26 फरवरी को क्षत-विक्षत अवस्था में मिला था।

गोकुलपुरी थाना पुलिस ने शाहनवाज के खिलाफ आईपीसी की धारा 147/148/149/302/201/436/427 के तहत एफआईआर दर्ज की थी। दिलबर नेगी उन लोगों में से है जिसकी हत्या हिंसा के दौरान सबसे ज्यादा क्रूरता से की गई थी।

दिलबर नेगी (22) अनिल स्वीट हाउस में वेटर के रूप में काम करता था। दंगाइयों ने अनिल स्वीट हाउस में बुरी तरह तोड़फोड़ कर दी थी। साथ ही उन्होंने दिलबर की हत्या कर उसके दोनों हाथ तक काट दिए थे। दिलबर का शव 26 फरवरी को अनिल स्वीट हाउस के दूसरे फ्लोर पर मिला था।

शाहनवाज पर आरोप है कि उसने साथियों संग मिलकर 24 फरवरी के दिन शिव विहार तिराहा के पास के कई दुकानों में तोड़फोड़ और पत्थरबाजी की। साथ ही कई दुकानों को आग के हवाले कर दिया। शाहनवाज ने एक बुक स्टोर और मिठाई की दुकान के गोदाम में घुसकर तोड़फोड़ के बाद दोनों दुकानों को आग लगा दी।

इन्हीं दुकानों में से एक मिठाई की दुकान में काम करने वाले दिलबर सिंह का शव पुलिस को 26 तारीख को मिला था। शव के दोनों हाथ कटे हुए थे। एक प्रत्यक्षदर्शी ने शाहनवाज को 24 फरवरी के दिन भीड़ को भड़काने वाले मुख्य शख्स के रूप में पहचाना है।
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सामने आया दिल्ली हिंसा का मरकज कनेक्शन, आरोपी फारुक के कॉल डिटेल से हुआ खुलासा

दिल्ली हिंसा (सांकेतिक तस्वीर)

दिल्लीः आजादपुर में शांति भवन इमारत में लगी आग, दमकल की कई गाड़ियां मौके पर

दिल्ली के आजादपुर इलाके में गुरुवार दिन में उस वक्त हड़कंप मच गया जब एक बिल्डिंग में आग लगने की सूचना फैली। आग लगते ही इसकी सूचना दमकल विभाग को दी गई, जिसके बाद कई गाड़ियां मौके पर पहुंची हैं और आग पर काबू पाया।

उत्तर पश्चिमी दिल्ली के आजादपुर के शॉपिंग कॉम्प्लेक्स में गुरुवार को आग लग गई। दिल्ली अग्निशमन सेवा के एक अधिकारी ने बताया कि इसमें किसी के झुलसने की खबर नहीं है। 

दिल्ली अग्निशमन सेवा के निदेशक अतुल गर्ग ने बताया कि विभाग को आग के संबंध में सुबह 11 बजे के आस-पास कॉल मिली जिसके बाद दमकल के नौ वाहनों को घटनास्थल पर भेजा गया।

उन्होंने बताया कि दोपहर 12 बजे तक आग पर काबू पा लिया गया और स्थान को ठंडा करने का कार्य जारी है। आग लगने के पीछे की वजह की जांच की जा रही है।
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विधायक प्रकाश जरवाल ने ससुर के अंतिम संस्कार के लिए मांगी अंतरिम जमानत, आज कोर्ट सुनाएगी फैसला

दिल्ली एम्स के सैकड़ों कर्मी 15 से हड़ताल की तैयारी में, निदेशक को दी चेतावनी

कोरोना काल में दिल्ली एम्स के सैंकड़ों कर्मचारियों ने मास लीव पर जाने की तैयारी कर ली है। बुधवार को एम्स के निदेशक को चेतावनी भरा ईमेल भेजते हुए कर्मचारियों ने आगामी 10 जून को मास लीव और 15 जून से अनिश्चित कालीन हड़ताल पर जाने की घोषणा की है। 

दरअसल विभिन्न मांगों को लेकर एम्स में नर्सिंग यूनियन पिछले कई दिनों से विरोध दर्ज करा रही है। 29 मई को भी यूनियन की ओर से प्रबंधन को शिकायत की थी लेकिन आरोप है कि उनकी मांगों पर सुनवाई न होने की वजह से अब उनके पास हड़ताल के अलावा कोई विकल्प नहीं है।
कोरोना वायरस को लेकर किसी भी अस्पताल में यह पहली सबसे बड़ी हड़ताल हो सकती है।

एम्स के नर्सिंग कर्मचारियों का कहना है कि वे पिछले तीन दिन से एम्स निदेशक कार्यालय में धरना प्रदर्शन कर रहे हैं। 1 जून से वह हर दिन निदेशक कार्यालय में जाते हैं ताकि उनकी सुनवाई हो सके लेकिन अब तक किसी भी अधिकारी ने उनकी मांग पर चर्चा नहीं की है। 

इससे पहले भी कई बार एम्स प्रबंधन को पत्र व्यवहार करते हुए कोरोना योद्धाओं की मांगों के बारे में बता चुके हैं लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हो रही है। इसलिए बुधवार को यूनियन की ओर से निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया को ईमेल करते हुए 10 जून को मास लीव पर जाने और 15 जून से अनिश्चितकालीन हड़ताल करने की जानकारी दी गई है।


ड्यूटी चार घंटे करने की मांग 
ड्यूटी 4 घंटे करने समेत अन्य मांगों को लेकर नर्सिंग यूनियन का प्रदर्शन एम्स प्रशासन के खिलाफ लगातार तीसरे दिन बुधवार को भी जारी रहा। कर्मचारियों ने एम्स के निदेशक रणदीप गुलेरिया के नाम एक पत्र भी लिखा है जिसमें उन्होंने कई मांगें रखी हैं। 

कर्मचारियों का कहना है कि उनकी ड्यूटी छह के बदले 4 घंटे की जाए। साथ ही रोटेशन पॉलिसी के तहत उनकी ड्यूटी लगाई जाए। यूनियन के अध्यक्ष हरीश काजला ने बताया कि कोविड-19 वार्ड में स्वास्थ्य कर्मचारी पीपीई किट पहनकर लगातार छह घंटे से आठ घंटे तक काम कर रहे हैं। इससे कई कर्मचारियों की सेहत खराब हो गई है, खासतौर पर महिला कर्मियों की।
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