विज्ञापन
विज्ञापन
अधिक मास एकादशी पर कराएं खीर का दान, ग्रहों के बुरे प्रभाव होंगे दूर
astrology

अधिक मास एकादशी पर कराएं खीर का दान, ग्रहों के बुरे प्रभाव होंगे दूर

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

From nearby cities

अपराजिता: अपनी सर्जरी का दर्द भूलकर कोरोना काल में संक्रमितों की सेवा कर रहीं शोभना पठानिया

नर्सिंग ऑफिसर शोभना पठानिया कोरोना काल में पूरी निष्ठा के साथ अपने कर्तव्य का पालन कर रही हैं।

23 सितंबर 2020

विज्ञापन
Digital Edition

Bharat Bandh Live Updates: कृषि विधेयकों के विरोध में आज 'भारत बंद', ट्रैक पर किसान, बाजार सुनसान

पंजाब में सुनसान पड़े बाजार पंजाब में सुनसान पड़े बाजार

पंजाब में बड़ा हादसा, डेराबस्सी में निर्माणाधीन इमारत ढही, मालिक समेत चार की मौत, तीन बाल-बाल बचे

शहर के रामलीला मैदान के नजदीक मीरा मल्ली मोहल्ले में वीरवार की सुबह निर्माणाधीन एक मंजिला कॉमर्शियल इमारत गिरने से चार लोगों की मौत हो गई। जबकि इस हादसे में तीन लोग बाल-बाल बच गए। इस इमारत के गिरने का कारण इसकी बनाई गई कमजोर नींव बताया जा रहा है। इस इमारत के साइज और वजन के हिसाब इसके लैंटर को रोकने के लिए नीचे बनाए गए पिलर्स की संख्या भी कम थी। इसके साथ ही इमारत के निर्माण में पुराना सरिया और पुरानी ईंटें इस्तेमाल की गई थी। मृतकों में इमारत का मालिक रिटायर्ड मास्टर हरिदेव सिंह सहित तीन मजदूर शामिल हैं। जबकि इस हादसे में तीन लोग बाल-बाल बच गए।

डीसी मोहाली गिरीश दियालन ने मौके का दौरा कर राहत प्रबंधों का जायजा लिया और एसडीएम कुलदीप बावा को मजिस्ट्रेट जांच के आदेश देकर दस दिन में रिपोर्ट देने को कहा है। मिली जानकारी के मुताबिक रामलीला मैदान के नजदीक सुबह साढ़े 9 बजे एक लाइन में बनाई जा रही दस अवैध दुकानों की 100 फुट लंबी और 15 फुट चौड़ी इमारत लैंटर सहित गिर गई। इस दौरान लैंटर के नीचे इमारत का मालिक और मजदूरों समेत सात लोग मौजूद थे।

इस दौरान अचानक दीवारोें सहित लैंटर गिरने से मौके पर लोग जमा हो गए और लोगों ने तीन मजदूरों को और मालिक को तुरंत बाहर निकाल लिया। मजदूरों की हालत खतरे से बाहर थी, जबकि इमारत के मालिक की गंभीर हालत को देखते हुए उसे जीएमसीएच-32 चंडीगढ़ में दाखिल करवाया गया। यहां उसकी इलाज के दौरान मौत हो गई। इस हादसे की खबर मिलते ही एसडीएम डेराबस्सी कुलदीप बावा, डीएसपी गुरबख्शीश सिंह और डेराबस्सी थाना प्रभारी सतिंद्र सिंह मौके पर पहुंच गए और उन्होंने राहत कार्य के लिए एनडीआरएफ की टीम को मौके पर बुलाया।

पिंजौर से पहुंची 24 सदस्यों की टीम ने राहत कार्य शुरू कर चार घंटे में करीब तीन बजे तक मलबे के नीचे दबे मजदूरोें के तीन शव बाहर निकाले। इस हादसे में चारों मृतकों की पहचान इमारत का मालिक रिटायर्ड मास्टर हरिदेव सिंह और मजदूरोें में 48 वर्षीय गोपीचंद, जिसके तीन बच्चे हैं, 55 वर्षीय राजू जिसके सात बचे हैं, और रमेश जिसके दो बच्चे हैं, के रूप में हुई है। जबकि तीन मजदूर पप्पू, अजीत और दिनेश बाल-बाल बच गए। मृतक मजदूर मूलरूप से अन्य राज्यों के थे और हाल में साधू नगर के बाग में रहते थे।





घायलों को पुलिस और एनडीआरएफ की टीम ने सही सलामत मलबे से बाहर निकाला। उनका प्राथमिक उपचार नजदीक के अस्पताल में करवाया गया। मौके पर सबसे पहले आसपास के लोग पहुंचे और उसके बाद मामले की जानकारी पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को दी गई। 

मौके पर पहुंची पुलिस की टीम और यहां मौजूद लोगों ने मिलकर इमारत के मालिक समेत चार लोगों को मलबे के नीचे से निकाला और उसके बाद में उपचार के लिए नजदीक के अस्पताल में भर्ती करवाया। इमारत मालिक की स्थिति नाजुक होने पर उसे जीएमसीएच सेक्टर-32 चंडीगढ़ में रेफर किया गया, जहां उसकी मौत हो गई।


 

 
... और पढ़ें

कैप्टन और रंधावा ने साधा नरेंद्र सिंह तोमर पर निशाना, सुनील जाखड़ बोले- बंद को कामयाब बनाए पंजाबी

कृषि विधेयकों के संबंध में पंजाब सरकार और कांग्रेस पार्टी पर लगाए केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के आरोपों को मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने झूठा करार दिया। उन्होंने हैरानी हैरानी जताते हुए कहा कि एनडीए सरकार की किसानों को बर्बाद करने की साजिश को आगे बढ़ाने में तोमर ने तहजीब और अदब को बिलकुल ही त्याग दिया है। कृषि मंत्री कांग्रेस के खिलाफ खासकर उनके खिलाफ गुमराह करने वाले प्रचार में व्यस्त हैं। कैप्टन ने कहा कि एक इंटरव्यू का हिस्सा रहा कृषि मंत्री का बयान बेतुका है।

तोमर द्वारा किए गए इस सवाल कि क्यों उन्होंने (कैप्टन ने) अपने मैनिफेस्टो में एपीएमसी को बदले जाने की बात कही, का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह साफ तौर पर जाहिर होता है कि केंद्रीय मंत्री ने पंजाब कांग्रेस का 2017 का मैनिफेस्टो पढ़ने का भी प्रयास नहीं किया। मैनिफेस्टो में साफ तौर पर यह वादा किया गया था कि एपीएमसी एक्ट को नया रूप दिया जाएगा। इसमें एमएसपी प्रणाली के साथ छेड़छाड़ किए बिना किसानों  की उपज राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंडियों तक पहुंचने में मदद करने की बात थी। 

किसानों को मूर्ख बनाने के लिए कोरा झूठ बोल रहे तोमर : कैप्टन
मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस के 2019 के चुनावी घोषणा पत्र में भी स्पष्ट तौर पर दर्ज है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य को हर कीमत पर सुरक्षित रखा जाएगा और राज्य सरकारों द्वारा हजारों मार्केट/मंडियां स्थापित की जाएंगी। इनसे किसानों को अपना उत्पाद लाभ के साथ बेचने के लिए आसान पहुंच मुहैया करवाई जा सके। मुख्यमंत्री ने तोमर को चुनौती देते हुए कहा कि आप यह बताओ कि आपके तीन कृषि विधेयकों में कहीं भी किसानों के साथ ऐसे वादे का जिक्र क्यों नहीं किया गया? उन्होंने किसानों को मूर्ख बनाने के लिए कोरा झूठ फैलाने पर मंत्री की कड़ी आलोचना की। मुख्यमंत्री ने कहा कि तोमर के आरोपों के उलट कांग्रेस का अपने वादों से पीछे हटने का सवाल ही पैदा नहीं होता, चाहे यह राष्ट्रीय स्तर पर हों या राज्य स्तर पर।
... और पढ़ें

पंजाब बंद: जारी रहेगी इंटरनेट सेवा, एसजीपीसी दफ्तर रहेंगे बंद, रेल ट्रैक-सड़कों पर किसानों का डेरा

पंजाब में कृषि विधेयकों के खिलाफ किसान संगठनों द्वारा घोषित पंजाब बंद और रेल रोको आंदोलन के दौरान सोशल मीडिया पर गुरुवार को एक खबर वायरल हुई, जिसमें दावा किया गया कि पंजाब में गुरुवार शाम से कल रात तक इंटरनेट सेवाएं बंद रहेंगी। यह खबर वायरल होने के बाद मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार की तरफ से जारी स्पष्टीकरण में कहा गया है कि इंटरनेट बंद होने की झूठी खबरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं, जबकि सरकार की तरफ से इंटरनेट सेवा बंद करने के बारे में कोई आदेश जारी नहीं किया गया है। मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार रवीन ठुकराल ने ट्वीट कर कहा कि पंजाब में इंटरनेट सेवाएं बंद करने का एलान नहीं किया गया है। सोशल मीडिया पर चल रही अफवाहों पर भरोसा न किया जाए।

अमृतसर: किसान-मजदूर रेल ट्रैक पर लेटे
कृषि विधेयकों के विरोध में किसान-मजदूर संघर्ष कमेटी के सैकड़ों सदस्य गुरुवार को जंडियाला के गांव देवीदासपुर के पास अमृतसर-दिल्ली रेलवे ट्रैक पर लेट गए। गांव के रेलवे स्टेशन पर भी किसानों ने कब्जा कर लिया। किसानों ने रेलवे ट्रैक के आसपास टेंट लगा लिए हैं। किसान-मजदूर संघर्ष कमेटी के महासचिव सरवन सिंह पंधेर के अनुसार यह धरना-प्रदर्शन अनिश्चितकालीन है। प्रदर्शन में आने वाले किसानों के लिए लंगर का भी प्रबंध हैं।

प्रदर्शन के कारण अमृतसर से चलने वाली 12 गाड़ियां रद्द कर दी गई हैं। अमृतसर से कोई भी गाड़ी रवाना नहीं हुईं। जिन गाड़ियां को दिल्ली से अमृतसर पहुंचना था, उन्हें अंबाला में रोक दिया गया। कुछ गाड़ियों के रूटों में परिवर्तन कर उन्हें गंतव्य स्टेशन तक पहुंचाया गया। वैसे कोरोना के कारण अमृतसर रेलवे स्टेशन से 12 गाड़ियां ही चल रही थी।

वहीं गुरुवार को ट्रेनें रद्द रहने से यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। झारखंड जाने वाले चेतन ने बताया कि उनकी टिकट बुक थी लेकिन यहां आकर पता चला कि सभी ट्रेन रद्द हो गई हैं। एक अन्य यात्री कुलदीप का कहना था कि रेलवे को इस बात की जानकारी पहले देनी चाहिए थी। 
... और पढ़ें

वित्तमंत्री का आरोप- किसानों को एमएसपी से वंचित करना चाहता है केंद्र, शिअद ने किया पलटवार

पंजाब बंद आज
पंजाब सरकार के किसानों के हितों की सुरक्षा के लिए हमेशा प्रतिबद्ध रहने का भरोसा देते हुए पंजाब के वित्त मंत्री मनप्रीत सिंह बादल ने कहा है कि किसान विरोधी कृषि विधेयकों के खिलाफ खिलाफ वह आखिरी दम तक लड़ेंगे।वीरवार को पंजाब भवन में प्रेस कांफ्रेंस के दौरान वित्त मंत्री ने कहा कि कृषि विधेयकों का मुख्य मकसद किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के सुरक्षा कवच से वंचित करना और देश के अन्नदाता को बर्बाद करना है।

यह विधेयक केवल किसानों को ही नहीं बल्कि सभी पंजाबियों को बुरी तरह प्रभावित करेंगे। संकट की इस घड़ी में सभी पंजाबियों को समझदारी से काम लेने की अपील करते हुए मनप्रीत बादल ने कहा कि पंजाबियों को सख्त मेहनत और किसी भी जबर, अन्याय और बेइंसाफी के खिलाफ संघर्ष में निर्भिक रहने का वरदान है।

किसानों के हितों को नुकसान पहुंचाने वाले कदमों को कभी भी बर्दाश्त नहीं करेंगे और पंजाब सरकार की तरफ से भाजपा की अगुवाई वाली केंद्र सरकार की जन विरोधी नीतियों का डट कर विरोध करेगी। उन्होंने किसी को भी किसानों के हितों को नुकसान पहुंचाने की आज्ञा नहीं दी जाएगी।
... और पढ़ें

डेराबस्सी हादसे ने खोली प्रशासन की पोल, एनडीआरएफ ने संभाला मोर्चा, तब मलबे से निकले शव

डेराबस्सी में एक इमारत के गिरने से चार लोगों की मौत के मामले ने गुरुवार को ऐसे हादसों में प्रशासन की तैयारियों की पोल खोल कर रख दी है। जानकारी के मुताबिक हादसा साढ़े 9 बजे हुआ था। इसके बाद करीब सवा 10 बजे प्रशासनिक अधिकारी और अन्य टीमें जिनमें फायर ब्रिगेड, सेहत विभाग की टीमें मौके पर पहुंच गई थीं। 

लेकिन देखा यह गया कि प्रशासनिक अधिकारियों के पास ऐसे हादसों से निपटने के लिए कोई भी प्रबंध नही थे। प्रशासनिक अधिकारियों ने दो जेसीबी मशीनों को मौके पर बुलाकर गिरे मलबे को हटाने की कोशिश की। जो कि काफी मुश्किल था। लेकिन 11 बजे के करीब एनडीआरएफ की टीम मौके पर पहुंच गई। टीम आते ही राहत कार्य में जुट गई और उन्होंने कुछ घंटों में दो शव बाहर निकाल लिए। 

इसके बाद भी उन्होंने विशेष कैमरों और खुफिया कुत्तों की मदद से  लोगों की तलाश की, जब उनको तसल्ली हो गई तो करीब 4 घंटों के बाद 3 बजे उन्होंने अपना ऑपरेशन बंद किया। इस टीम के पास लेंटर काटने से लेकर हर जरूरत का सामान उपलब्ध था। अगर निर्माण के मुताबिक यहां पर बीस दुकानें बस जातीं और इसके यह हादसा तब होता तो यहां पर काफी लोगों की जान जा सकती थी।
... और पढ़ें

कृषि विधेयक के विरोध में पंजाब में ट्रैक पर धरने पर बैठे किसान, तीन दिन चलेगा 'रेल रोको आंदोलन'

किसानों के समर्थन में कल मोहाली रहेगा बंद, खरड़ मे जुटेंगे अन्नदाता, दूध की सप्लाई रहेगी जारी

कृषि विधेयकों के विरोध में शुक्रवार को पूरा मोहाली बंद रहेगा। हालांकि लोगों की सुविधा के लिए जरूरी चीजों की सभी दुकानें खुलेगी रहेंगी। यहां तक कि रेस्टोरेंट और होटल भी खुलेंगे। वेरका द्वारा लोगों को दूध की सप्लाई भी नियमित रहेगी। दूसरी ओर बंद को व्यापारी, कलाकार, एडवोकेट, साहित्यकार और अन्य वर्गों के सभी लोगों ने अपना समर्थन दिया है। 

जानकारी के अनुसार, किसान खरड़ में इकट्ठे होंगे। इसके मद्देनजर सुरक्षा व्यवस्था भी बढ़ा दी गई है। रेलवे स्टेशनों समेत सार्वजनिक स्थलों पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। एसएसपी कुलदीप सिंह चहल का कहना है कि पुलिस की तरफ से सारे इंतजाम पूरे किए गए है। 

मोहाली व्यापार मंडल के प्रधान विनीत वर्मा का कहना है कि व्यापार मंडल ने किसानों को पूरा समर्थन देने का फैसला लिया है। किसानों के पक्ष में मोहाली में जरूरी चीजों को छोड़कर अन्य सभी दुकानें शाम चार बजे तक बंद रहेंगी। उनका कहना है कि मोहाली जिले में ऐसे बहुत से लोग और युवा हैं, जो यहां नौकरी करने या पढ़ने आए हैं। उनकी परेशानी को देखते हुए होटल व रेस्टोरेंट को भी बंद से छूट दी गई है।  
... और पढ़ें

बाजार, स्कूल और बार खुले... पर ओपीडी अब तक बंद, लोग पूछ रहे- क्या यहीं से फैलता है कोरोना

कोरोना महामारी के कारण 29 मार्च से पीजीआई समेत चंडीगढ़ के सभी अस्पतालों की ओपीडी बंद है। इससे लोगों में रोष फैल रहा है। क्योंकि गंभीर मरीजों के साथ ही अन्य मरीजों को इलाज नहीं मिल पा रहा है जिस कारण मरीज और उनके परिजन काफी परेशान है। 6 महीने से ओपीडी बंद होने से लोगों को पेश आ रही मुश्किल को दूर करने के लिए पीजीआई, जीएमसीएच-32 और जीएमएसएच-16 में टेली कंसल्टेशन सुविधा का संचालन किया जा रहा है।

लेकिन उससे भी मरीजों को राहत नहीं मिल पा रही है। लोगों ने कहा कि अब जब अनलॉक के तहत पहले बाजार, होटल, रेस्टोरेंट, बार और अब स्कूल खोले गए हैं। वैसे ही प्रशासन को अस्पतालों की ओपीडी को खोलने संबंधी भी निर्णय लेना चाहिए क्योंकि इन चीजों से ज्यादा जरूरी गंभीर मरीजों को इलाज मुहैया कराना है। अगर अब भी अस्पतालों की ओपीडी नहीं खोली गई तो कुछ ही दिनों में गंभीर मरीजों की जान बचानी मुश्किल होगी।

कोविड की तरह नॉन-कोविड के लिए भी बनाए जाएं दिशा-निर्देश
वर्ल्ड मेडिकल एसोसिएशन के एडवाइजर डॉ. रमनीक सिंह बेदी का कहना है कि अब प्रशासन को नॉन-कोविड मरीजों के इलाज को लेकर भी गंभीर होना चाहिए क्योंकि अगर अब भी उन्हें इलाज मुहैया नहीं कराया गया तो अचानक स्थिति भयानक हो सकती है। अस्पतालों की ओपीडी शुरू करने के लिए प्रशासन को कोविड की तरह ही नॉन-कोविड मरीजों के इलाज की व्यवस्था से जुड़े दिशा-निर्देश बनाने होंगे जिससे संक्रमण से बचाव करते हुए उनका इलाज हो सके।

ओपीडी बंद होने के कारण सबसे ज्यादा परेशानी कैंसर, टीबी, स्किन और टीकाकरण से रोकी जाने वाली बीमारियों से ग्रस्त मरीजों को हो रही है। प्रशासन को पीजीआई की ओपीडी के बजाय जीएमएसएच-16 व जीएमसीएच-32 की ओपीडी को संचालित कराने की व्यवस्था करनी चाहिए क्योंकि वहां की ओपीडी डेढ़ हजार से दो हजार ही है।
... और पढ़ें
Election
X

प्रिय पाठक

कृपया अमर उजाला प्लस के अनुभव को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।
डेली पॉडकास्ट सुनने के लिए सब्सक्राइब करें

क्लिप सुनें

00:00
00:00
X
  • Downloads

Follow Us