पाकिस्तान का वो खतरनाक 'सीरियल किलर', जो मालिश के बहाने तोड़ देता था गर्दन

फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Wed, 20 May 2020 10:42 AM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : pexels.com
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ये इसी साल जनवरी की बात है। पंजाब प्रांत की राजधानी लाहौर के भीड़-भाड़ वाले इलाके भाटी गेट में दाता दरबार के ठीक सामने मेट्रो बस के पुल के नीचे पुलिस को एक लावारिस लाश मिली। ऐसी ही एक लाश कुछ महीने पहले पास में ही इस्लाम पुरा से भी मिली थी। इन दोनों लोगों को तेज धार हथियार को सीने में घोंप कर कत्ल किया गया था। 
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मरने वाले दोनों व्यक्तियों को नशे की लत थी और 'मालिशिये' थे और ऐसे दर्जनों बेघर लोगों में शामिल थे, जो दाता दरबार और उसके आस-पास के इलाकों में सड़क के किनारे रहते हैं। हर समय लोगों से भरे रहने वाले इस इलाके में कौन इन व्यक्तियों को किस समय और कैसे कत्ल कर गया, किसी को नहीं पता था। 
वारदात का पैटर्न
और फर्ज कीजिए कि अगर पता भी था तो कम से कम किसी ने शुरुआती जांच करने वाली पुलिस को इस बारे में कुछ नहीं बताया। पास ही के इलाकों शाद बाग और फिर रावी रोड से भी एक साल पहले दो लाशें मिली थीं। उन दोनों घटनाओं में भी वारदात का पैटर्न एक जैसा था। उन दोनों की हत्या गर्दन की हड्डी तोड़ कर की गई थी। राह चलते लोगों को गर्दन तोड़ कर कत्ल करना आम तौर पर मुजरिम का तरीका नहीं था। नशे की लत वाले लोग अक्सर भीख मांगते नजर आते हैं। मालिशिये भी मालिश से इतना ज्यादा पैसा नहीं कमा पाते, ऐसे लोग छोटे-मोटे जुर्म में शामिल पाए जाते हैं। तो क्या उनके पास इतना पैसा था कि उसके लिए उन्हें कत्ल किया गया?

अगर नहीं तो कातिल ऐसे लोगों के पीछे क्यों था? काफी समय तक जांच के बाद भी स्थानीय पुलिस इस बात का जवाब और मुजरिम का सुराग नहीं लगा पाई तो भाटी गेट और इस्लाम पुरा की घटनाओं की जांच क्रिमिनल इन्वेस्टीगेशन एजेंसी यानी सीआईए सदर को सौंपी गई। 

इस्लाम पुरा के इलाके में...

पुलिस ने शुरुआत भाटी गेट पर कत्ल होने वाले व्यक्ति से की। शुरुआती जांच में पता चला कि मरने वाले की 'जाति' के लोग उन्हें 'भोला मालिशिया' के नाम से जानते थे। उन्होंने पुलिस के पूछने पर बताया कि 'लंबे समय से वो दाता दरबार के ही आस-पास रह रहा था। किसी को नहीं पता वो कहां से आया था, कौन था।' 

इस्लाम पुरा के इलाके में पिछले साल सितंबर में कत्ल होने वाले व्यक्ति की पहचान बंद रोड के रहने वाले 21 वर्षीय फहीम के नाम से हुई। घर वालों ने पुलिस को बताया था कि उसे नशे की लत थी और अक्सर कई कई दिन के लिए घर से गायब हो जाता था। ऐसे बेघर लोगों को कौन मार सकता था?

ये पुलिस के लिए एक रहस्य भी था और सुराग भी। जिन लोगों में उनका उठना-बैठना था, उनकी मौत का राज भी उन्ही के पास हो सकता था। सीआईए पुलिस जांच के बाद एक ऐसे व्यक्ति तक पहुंच गई जो उन चारों हत्याओं में शामिल होने के साथ-साथ रावलपिंडी में भी एक व्यक्ति को गर्दन तोड़ कर मार चुका था। 
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पुलिस कातिल तक कैसे पहुंची?

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